इन भीड़ों की लम्बी दौड में
साँस लेने की फुरसत नही
बस आँखें मूंद दौड़ते हैं
आगे बढने का एहसास नही
बड़े शहरों के छोटे घरों में अपनी जगह ढूँढता है, ढूँढता है
एक अकेला इस शहर में
रात में और दोपहर में
आबोदाना ढूँढता है
आशियाना ढूंढता है
एक अकेला इस शहर में ।