Tuesday, 20 August 2013

एक अकेला इस शहर में



इन भीड़ों की लम्बी दौड में
साँस लेने की फुरसत नही
बस आँखें मूंद दौड़ते हैं
आगे बढने का एहसास नही
बड़े शहरों के छोटे घरों में अपनी जगह ढूँढता है, ढूँढता है

एक अकेला इस  शहर में
रात में और दोपहर में
आबोदाना  ढूँढता है
आशियाना ढूंढता है

एक अकेला इस शहर में ।